मंगलवार, 12 जून 2012

ek shikshika se dusri shikshika ki baatein

एक बार एक शिक्षिका दूसरी शिक्षिका से कहती है की आजकल यह प्रश्न उठ रहा है की बच्चों का चारित्रिक निर्माण करने में शिक्षक लोग सहायक नहीं होते चिंता होती है बच्चो के भविष्य को देखकर आजकल बच्चे शिक्षको का सम्मान ही करना नहीं जानते और आजकल बच्चो को डाटने का नतीजा शिक्षक और शिक्षिकाओं की मौत निकल रहा है आजकल येही तो इस भारत में हो रहा है तो शिक्षिका कहती है दूसरी शिक्षिका से चुप रहने में ही भलाई है इसलिए चुप ही बैठे रहो सच में एक शिक्षिका की चिंता ही इसमें दिखाई देती है की आजकल बच्चे शिक्षको का सम्मान करना ही नहीं जानते जिस उम्र में बच्चो को शिक्षको का सम्मान करना चाहिए आज वही बच्चे शिक्षको का सम्मान करना नहीं जानते कैसी दुनिया हो गयी है ये पर कही न कही बच्चे भी गलत हैं जो शिक्षको का सम्मान नहीं करते और उनके लिए अभद्रता का प्रयोग हो रहा है ऐसे में शिक्षक और शिक्षिकाएँ क्या करें जब बच्चे ही ऐसे हो गए हैं तो क्या हमारे देश के यही संस्कार हैं क्या येही शिक्षा है हमारे संतो की आज हमारा देश एक अच्छा देश बनकर उभर रहा है दुनिया के सभी देशों में इसकी गिनती होती है पर जब भारत के बच्चे ही शिक्षक और शिक्षिकाओं का सम्मान नहीं करेंगे तो हमारे देश का येही हाल होगा इसीलिए यह सोचना चाहिए बच्चों को की अगर शिक्षक और शिक्षिकाओं का सम्मान नहीं होगा अभद्रता का उनके लिए प्रयोग होगा तो ज्ञान कैसे मिलेगा और तभी तो आजकल के बच्चो को कुछ समझ में नहीं आ रहा है शिक्षकों और शिक्षिकाओं का सम्मान एक मुद्दा है हमें इसके लिए एकजुट होना होगा अब हमें यह सोचना चाहिए की आखिर हम शिक्षको के सम्मान को कैसे बढ़ावा दें बच्चो को बताइए की शिक्षको और शिक्षिकाओं का सम्मान कितना जरुरी है फिर एक शिक्षिका अपनी दूसरी शिक्षिका से कहती है की आजकल के बच्चो की हवा कैसी ख़राब हो गयी है शिक्षको को मार दे रहे हैं उनसे उनकी जिंदगी छीन रहे हैं मुझे तो अब डाटने फटकारने की विधि का अधिकार ख़त्म होता दिख रहा है परीक्षा में ही देख लो कैसे नक़ल करने में डाटें तो आजकल के बच्चे ही ऐसे हो गए हैं आजकल के बच्चो की हवा ही खराब हो गयी है में तो यही कहती हूँ की बच्चे जो करते हैं करने दो जिंदगी जीने के लिए है मरने के लिए नहीं इसलिए पैसा कमाओ और चुपचाप बैठे रहो येही एक रास्ता है वर्ना हमारी तो जिन्दगी ही चली जायेगी यहाँ भी एक शिक्षिका की विडम्बना ही दिखाई दे रही है वो अब बच्चो को डाटने से भी डर  रही हैं कैसी विडम्बना है इस देश की शिक्षको और शिक्षिकाओं का सम्मान आज एक मुद्दा है पर इस के लिए सभी शिक्षको और शिक्षिकाओं को एकजुट होना होगा यह तभी होगा जब सभी शिक्षक और शिक्षिकाएँ रूचि लें अंत में में यह लेख अपनी कविता के साथ ख़त्म करना चाहूँगा
ज्ञान दीप से दीप जलाकर
शिक्षक यश आलोकित करते
कितने ही आदर्श सजाकर
जन जन में नैतिकता  भरते
इस कविता में यही कहा गया है की शिक्षक ज्ञान दीप जलाकर कितने अरमान संजोकर उनमे नैतिकता भरता है और छात्र हैं की शिक्षक और शिक्षिकाओं का सम्मान नहीं करते सभी छात्रों को शिक्षक का सम्मान करना चाहिए अगर विद्या का अच्छे से अभ्यास करना है तो
धन्यवाद
प्रिय शिक्षिका रूचि मैडम को समर्पित

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